कवि बिहारी

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सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर।  देखन में छोटे लगै, घाव करें गंभीर।।  इस दोहे के माध्यम से कवि बिहारी जी ने कम शब्दों में बड़ी बात कह दी है, ...

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